सोसिअल साइट्स | नेट अडिक्ट
सुना है की इंडिया को जवान हुए कई साल हो चुके, पर क्या इस जवान भारत में जवान इन्सान को समझदार माना जाता है ?
शायद आज तक तो नहीं !!!
क्युकी जवान हमेशा से विद्रोही और जल्दबाज़ रहे है अति भावुक और अति आक्रामक ...
कई ऐसे अपवाद है जिन्होंने साबित कर दिया की हम ठन्डे दिमाग से एक सृजनात्मक काम भी कर सकते है |
अगर आज की बात की जाये तो हर तरह गलाकाट प्रतिस्पर्धा शुमार पर है , जो लूट ने में जितना कुशल होगा बाज़ी मर जायेगा | हर वो शख्स जिसे कमाना है उसे कठोर और चलाक होने के साथ साथ एक ऐसा वक्ता बनना पड़ेगा जिसे सुनने की आदत नहीं और बोलने की लत हो |
ऐसे में महंगाई की उम्र बढ़ रही है और हर गृहस्थ अपने काम को बढाने मे लगा है | हर शख्स चाहता है की उसे कोई इन झंझटो से हटाकर किसी ऐसी दुनिया मे ले जाये जहा पैसो से जादा रिश्तो मे बंधे इन्सान के दिल की अहमियत हो , कोई ऐसा जिसके साथ कुछ ऐसे पल देखे जो अक्सर जगती आँखों से मुस्कान के साथ बुने हो , कोई ऐसा जिसे अतीत से कोई ताल्लुक ना हो और न ही भविष्य के बारे मे भाषणबाज़ |
बस अहमियत दे और प्यार से रहे फिर वो चाहे दोस्त हो या फिर ऐसे ही किसी रीशे का नाम लेकर आने वाला फ़रिश्ता | या फिर कुछ ऐसा जिसे टाइम पास का नाम देकर अपना दिल हल्का किया जाये |
दिन ब दिन घर का दायरा बढ़ता जा रहा है खास कर शहरो मे , और वो हर बीमारी जो शहर से होते हुए गाँव और कस्बो मे फ़ैल जाती है उसी तरह और एक बीमारी आई
" नेट अडिक्ट "
किसी से बात करना , दिल की बात शेयर करना और टाइमपास करना यहाँ तक तो बात ठीक थी पर जब यही आदत बन जाये और इस आदत से छुटकारा न पाया जाय तो समझ लेना की वो सर्दी का शिकार हो गया अब गोली लेनी होगी | जो की काफी हद तक उसी इन्सान के मानसिक संतुलन पे निर्भर करता है |
जो नेट अडिक्ट है | बस कोशिश करे और यही कोशिश इस दिक्कत से बहार निकलेगी |
वैसे आज हर इन्सान जो नेट यूजर है या फिर पढ़ा लिखा है वो जनता है की संपर्क (कम्युनिकेशन) एक जरुरी बात है और उसका बहोत फायदा भी है पर
कहते है की एक बीमारी ठीक होने की गोली हिसाब सेली जाये तो बीमारी ठीक हो जाएगी पर अगर वही गोली बेहिसाब ली जाये तो नई बीमारी से निपटना पड़ेगा |
आशा करूँगा की आप इस गोली का इस्तेमाल अपने मन को हमेशा खुश और हरा भरा रखने की अदा जान जायेंगे और इसे एक मेडिसिन ही समझेंगे जो आपको स्वस्थ और प्रफुल्लित कर देगी |
धन्यवाद् !