ये तो होना ही था | बाजार में करेक्शन
महंगाई दर और बढ़ने वाली व्याज दर ये चिंताए क्या कम थी जो आई आई पि के नकारात्मत आंकड़ों के साक्षात्कार हो गए और मार्केट ने आव देखा ना ताव सीधे छलांग लगा दी और धडाम से गिर पड़ा ? ना सपोर्ट काम आया और ना ही सप्लाई का स्तर वैसे अगर आप एक आम निवेशक है और ब्रोकर के भरोसे कारोबार करते है तो हो सकता है या तो आप किन्ही शेअरों में फंस गए होंगे या फिर काफी लोस होने की वजह से शेअर को निचले भाव पे बेच डाला होगा !!!अगर नहीं तो काफी अच्छी बात है पर क्या आप जानते है की इस धुलाई की ब्लूप्रिंट कुछ दिनों पहले ही किसी जनाब ने जान ली थी .. किसी नही बल्कि किन्ही जनाबों ने यह बात निश्चित तौर पर मान ली थी की इनफ़ोसिस के अलावा ये तीन और कई वजह है जिनके दर्शन मात्र से हे बाजार मुह जमीं में गाड लेगा क्यूंकि झोल झमेले सुन कर बाजार उब चूका है अब कुछ एक्साईटिंग फ्लेवर भी
तो चाहिए था की अब बाजार का रुख बदले तो बदले कैसे ?
चलिए तो आपको बताये देते है की वो कोनसे महाशय है जिन्होंने बाजार की पतली हालत को जनवरी के शुरुवात में ही भांप लिया था ! तो वो है " तकनिकी विश्लेषक " [ टेक्नीकल अनालिस्ट ] जो जनवरी के शुरुवात से कई वेबसाइट, समाचार पत्र और टेलीविजन के माध्यम से हम तक पहुंचे थे और जिनका नजरिया काफी "नकारात्मक" था और इसी वजह से हमने इनकी बात को टालते हुए पंतप्रधान महोदय की १२ प्रतिशत विकास के लोलीपोप के झांसे में आ गए |
अगर निवेशक नही बल्कि एक आम नागरिक बनकर अगर हिन्दुस्थान की सद्य:स्थिति पर गौर किया जाये तो हम इस सदी में "अगली पीढ़ी के महंगाई के हालत " और झमेले बाज नायक , असंतुलित और अनियंत्रित आर्थिक ढांचा , और तो और जमाखोर और सट्टेबाजों के दम ख़म से बाजार की ही नही वरन पुरे देश की नैया राम भरोसे चल रही है | इतने और ऐसे कई कारन और हाँ फंडामेंटल कारकों की अहम् भूमिकाओं की सक पे यह बात तो धुधली ही सही पर प्रतीत तो होती है की बाजार में कीमतें कुछ ऊँची चल रही है |ऐसे ही नही बाहरी बाजार रोज नए स्तर छु रहे जब के विश्व के श्रेष्ठतम बाजार हिंदुस्थानी है जो
की इस साल का शुरुवाती फिस्लू साबित हो रहा है |