बेरोजगारों के सबसे बड़े शोषण कर्ता !!!
इस देश के लगभग ७०% बेरोजगार अपनी जिंदगी मे कम से कम एक बार तो अखबार के क्लासिफ़ाईड झोन वाले नौकरी के इश्तेहार को देखकर उस नौकरी कि आस मे अपना घर बार छोड्कर शहर कि और खिंच जाते है । और उस नौकरी का वास्तवीक स्वरुप से अपने सपनों के बनते आचार कि खाटास से वे बुरी तरह टुट जाते है । और ४०% से ५५% बेरोजगार अपने गांव वापस लौट जाते है और ३०% से १५% प्रतीशत बेरोजगार अपनी जिम्मेदारी निभाने कि जिद से और कुछ गांव मे होनेवाली बदनामी के डर से शहर के उन गुमनाम विराने मे खो जाते है जहां खो जाने के क्वाब भी उन्हे गलती से ही आया करते थे ।
